पठानकोट, पंजाब का यह छोटा लेकिन जीवंत शहर हिमाचल और जम्मू की सीमाओं के पास बसा है, जहाँ सेना की छावनी, व्यापारिक बाज़ार और आम लोगों की मेहनतकश ज़िंदगी एक साथ चलती है। यहाँ की गलियाँ भीड़भाड़ वाली हैं, मगर लोग अक्सर अजनबियों के प्रति भी नरम दिल रखते हैं। नाबार्ड के 2016-17 सर्वे के अनुसार पंजाब में औसत मासिक घरेलू आय ₹23,133 दर्ज की गई थी, जो देश में सबसे ज़्यादा मानी गई, पर इसका मतलब यह नहीं कि हर घर तक यह पैसा पहुँचता है — कई परिवार अब भी दिन-प्रतिदिन की लड़ाई लड़ रहे हैं। पठानकोट के लिए अलग से बेघर आबादी के आँकड़े दर्ज नहीं होते, इसलिए नज़दीकी बड़े शहर अमृतसर की जनगणना 2011 की रिपोर्ट देखें तो वहाँ लगभग 2,200 लोग बेघर के रूप में दर्ज हुए थे — यह अंदाज़ा देता है कि इस इलाके में भी मदद की ज़रूरत छोटी नहीं है। भूख लगे या सिर छुपाने की जगह चाहिए, तो मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की बहनें अक्सर ज़रूरतमंदों की मदद करती हैं, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की पठानकोट शाखा राहत सामग्री और कभी-कभी अस्थायी सहारा देती है, और अमृतसर की पिंगलवाड़ा संस्था भी इस पूरे इलाके के बेसहारा लोगों तक मदद पहुँचाने की कोशिश करती रहती है। रात अगर मुश्किल लगे, तो गुरुद्वारों का लंगर हमेशा खुला रहता है और वहाँ कोई सवाल नहीं पूछा जाता। तुम अकेले नहीं हो, इस शहर में भी कोई न कोई तुम्हारी तरफ हाथ बढ़ाएगा — बस हिम्मत मत हारना।