रुड़की, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में बसा एक मध्यम आकार का शहर है, जो आईआईटी रुड़की और सिंचाई अनुसंधान संस्थानों की वजह से जाना जाता है, पर इसके आसपास की गलियों और बाज़ारों में मेहनतकश और कम आय वाले लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं। यहाँ के औसत घरेलू आय के अनुमान बताते हैं कि उत्तराखंड में सालाना पारिवारिक आय लगभग 2 लाख रुपये के आसपास रहती है, लेकिन शहर के भीतर बहुत से परिवार इससे कहीं कम पर गुज़ारा करते हैं। रुड़की का अपना अलग बेघर-जनगणना आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए पड़ोसी हरिद्वार जिले के 2011 जनगणना के आंकड़े देखें तो वहाँ करीब 3,000 लोग बेघर दर्ज किए गए थे — आज यह संख्या घटी नहीं, बल्कि बढ़ी होने की संभावना है। ठंड की रातों में गंगनहर के किनारे, रेलवे स्टेशन के आसपास और बाज़ार क्षेत्रों में शरण लेने वाले लोग आम दिखते हैं, इसलिए गर्म कपड़े और सुरक्षित जगह ढूंढना यहाँ की सबसे बड़ी चुनौती रहती है। गूँज जैसी संस्था यहाँ कपड़ों और राहत सामग्री के लिए काम करती है, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की हरिद्वार शाखा आपातकालीन मदद और स्वास्थ्य शिविर आयोजित करती है, और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार गरीब व बेघर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का काम करता है। अगर तुम इस शहर की सड़कों पर रात बिता रहे हो, तो याद रखना कि तुम्हारा होना यहाँ मायने रखता है, और सुबह का उजाला हर हाल में लौटकर आता है।
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