ग्रेटर नोएडा

सड़क के साथी: बेघरों के लिए सहायता मार्गदर्शिका

देश:भारतजनसंख्या:293,908क्षेत्र:उत्तर प्रदेशनिर्देशांक:28.4962, 77.5360

ग्रेटर नोएडा एक तेज़ी से बढ़ता हुआ शहर है, जहाँ बड़ी-बड़ी सोसाइटी, कंपनियाँ और चौड़ी सड़कें एक तरफ हैं, तो दूसरी तरफ मजदूर बस्तियाँ और खाली पड़े प्लॉट भी हैं जहाँ रात गुज़ारने वाले लोग मिल जाते हैं। यहाँ औसत घरेलू आय करीब ढाई से तीन लाख रुपये सालाना मानी जाती है, पर यह बंटवारा बहुत असमान है—कुछ के लिए यह शहर सपना है, कुछ के लिए सिर्फ गुज़ारा। पास के दिल्ली शहर में 2011 की जनगणना के मुताबिक लगभग 47,076 बेघर लोग दर्ज हुए थे, और उसके बाद से यह संख्या और बढ़ी ही है, तो अंदाज़ा लगाइए कि दिल्ली-एनसीआर के इस हिस्से में स्थिति क्या होगी। ठंड की रातों में गौतम बुद्ध नगर ज़िला प्रशासन कुछ जगहों पर रैन बसेरे (नाइट शेल्टर) खुलवाता है, जिन्हें शहरी विकास प्राधिकरण और स्थानीय एनजीओ मिलकर चलाते हैं। गूंज नाम की संस्था इस इलाके में कपड़े, राहत सामग्री और ज़रूरी सामान बांटने का काम करती है, वहीं अक्षय पात्र फाउंडेशन जैसे संगठन खाने की व्यवस्था में मदद करते हैं। इनके अलावा कुछ स्थानीय गुरुद्वारे और मंदिर भी लंगर के ज़रिए मुफ्त भोजन देते हैं, जो भूखे पेट के लिए बड़ा सहारा बनते हैं। अगर आप यह पढ़ रहे हैं, तो बस इतना जान लीजिए—आपका होना मायने रखता है, और आज की रात भी किसी तरह गुज़र जाएगी।

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