हापुड़ उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद-मेरठ इलाके के बीच बसा एक छोटा लेकिन व्यस्त मंडी शहर है, जो अपने अनाज बाज़ार, पापड़-अचार उद्योग और NH-9 पर स्थित होने की वजह से जाना जाता है — यहां व्यापारियों, मज़दूरों और किसानों की आवाजाही लगातार रहती है। यह शहर छोटा है इसलिए यहां दिल्ली या मेरठ जैसी बड़ी अनजान भीड़ नहीं मिलती, पर इसका मतलब यह भी है कि मदद के साधन भी सीमित और बिखरे हुए हैं। हाल के सर्वे (ICE 360°, 2021) के अनुसार उत्तर प्रदेश के औसत परिवार की वार्षिक आय लगभग 1.2 लाख रुपये के आसपास रही, जो देश के औसत से काफी कम है — यानी यहां ज़्यादातर परिवार खुद ही मुश्किल से गुज़ारा करते हैं। हापुड़ के लिए अलग बेघर आंकड़ा दर्ज नहीं है, लेकिन पड़ोसी ज़िले गाज़ियाबाद में जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 2,915 लोग बेघर दर्ज किए गए थे, और शहरीकरण के साथ यह संख्या सालों में बढ़ी ही है। रात में ठहरने के लिए नगर पालिका परिषद हापुड़ द्वारा चलाया जा रहा रैन बसेरा एक भरोसेमंद जगह है, और कानूनी हक या मुश्किल में फंसने पर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से मदद मांगी जा सकती है। कपड़े, राशन या ज़रूरी सामान के लिए गूंज जैसी संस्था इस इलाके में समय-समय पर राहत सामग्री बांटती है, तो आसपास पूछते रहें कि कोई शिविर कब और कहां लगने वाला है। अगर आप इस वक्त हापुड़ की सड़कों पर हैं, तो यह जान लें — आपकी हालत आपकी कीमत नहीं तय करती, और रात कितनी भी लंबी क्यों न लगे, सुबह होती ज़रूर है।
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