मालदा, पश्चिम बंगाल का एक ऐसा शहर है जो महानंदा और कालिंदी नदियों के किनारे बसा है, अपने आम के बागानों, रेशम उद्योग और व्यस्त बाज़ारों के लिए जाना जाता है, जहाँ ग्रामीण और शहरी जीवन एक-दूसरे से गुँथे हुए हैं। यह पश्चिम बंगाल के आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में गिना जाता है, और जिला सांख्यिकी अनुमानों के अनुसार यहाँ कई परिवार आज भी लगभग 5,000-7,000 रुपये मासिक आय पर गुज़ारा करते हैं, जो राज्य के औसत से काफी कम है। मालदा शहर के लिए अलग से बेघर जनगणना उपलब्ध नहीं है, पर 2011 की जनगणना में निकटवर्ती महानगर कोलकाता में लगभग 6,600 लोग खुले में या बेघर स्थिति में रहते हुए दर्ज किए गए थे — यह दिखाता है कि बंगाल के शहरों में बेघरी कोई छोटी समस्या नहीं रही है। यहाँ भारत सेवाश्रम संघ और रामकृष्ण मिशन आश्रम जैसी संस्थाएँ भोजन और सहारे की कोशिश में जुटी रहती हैं, और मालदा नगरपालिका द्वारा NULM योजना के तहत चलाए जा रहे रैन बसेरे रात गुज़ारने की जगह देते हैं। सर्दियों की रातें यहाँ खासकर कठोर हो सकती हैं, इसलिए स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास बने अस्थायी शेल्टर समय रहते ढूँढ लेना ज़रूरी है। अगर आप यहाँ अकेले या मुश्किल में हैं, तो जान लीजिए कि आप अदृश्य नहीं हैं — यह शहर छोटा ज़रूर है, पर इसमें ऐसे लोग भी हैं जो मदद देना चाहते हैं।
✨কোথাও ভুল দেখেছেন?
সেকেলে তথ্য, ভুল বিবরণ, বাদ পড়া রিসোর্স, বন্ধ হয়ে যাওয়া বা পরিষেবার পরিবর্তন খুঁজে পেয়েছেন? আমাদের জানান যাতে আমরা এটি পর্যালোচনা করতে পারি এবং সবার জন্য এই সহায়িকাটি নির্ভুল ও সহায়ক রাখতে পারি।
আপনি যা রিপোর্ট করতে পারবেন
পুরোনো তথ্য
যে তথ্য আর বর্তমান নেই
বাদ পড়া রিসোর্স
যেসব পরিষেবা বা রিসোর্স তালিকায় থাকা উচিত
ভুল যোগাযোগের তথ্য
ভুল ফোন নম্বর, ইমেল বা ওয়েবসাইট
বন্ধ হওয়া
যেসব প্রতিষ্ঠান বা প্রোগ্রাম বন্ধ হয়ে গেছে
নতুন প্রোগ্রাম
আমাদের যেসব নতুন পরিষেবা বা প্রোগ্রাম যোগ করা উচিত
নিরাপত্তা নোট
নিরাপত্তা সংক্রান্ত উদ্বেগ বা গুরুত্বপূর্ণ সতর্কতা