दुर्ग, छत्तीसगढ़ का एक पुराना औद्योगिक शहर है, जो भिलाई स्टील प्लांट के साये में बसा है और यहाँ मेहनतकश लोगों की भीड़ हमेशा दिखती है, रेलवे स्टेशन और बाज़ार के इलाकों में ज़िंदगी की रफ़्तार तेज़ रहती है। यहाँ औसत घरेलू आमदनी लगभग 15,000 से 18,000 रुपये प्रति माह के आसपास मानी जाती है, जो कई परिवारों के लिए गुज़ारा मुश्किल बना देती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक दुर्ग-भिलाई शहरी क्षेत्र में करीब 1,200 लोग बेघर दर्ज किए गए थे, और स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि असली संख्या इससे कहीं ज़्यादा है क्योंकि कई लोग गिनती में ही नहीं आते। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य समाज कल्याण बोर्ड और नगर निगम दुर्ग-भिलाई द्वारा चलाए जा रहे रैन बसेरे (नाइट शेल्टर) रात को सिर छुपाने की जगह देते हैं, वहीं सेवा भारती जैसी संस्थाएँ खाना और कपड़े बाँटने का काम करती हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थानीय शाखा भी कभी-कभी मेडिकल कैंप और राहत सामग्री के ज़रिए मदद पहुँचाती है। अगर आप इस शहर में मुश्किल हालात से गुज़र रहे हैं, तो स्टेशन के पास या नगर निगम कार्यालय में जाकर रैन बसेरे की जानकारी ज़रूर लें, यहाँ के लोग अजनबियों की मदद करने में पीछे नहीं हटते। याद रखिए, रात चाहे जितनी भी लंबी क्यों न हो, सुबह का उजाला हर बार वापस आता है — आप अकेले नहीं हैं, यह शहर आपको भी अपना मानता है।
✨क्या आपको कोई गलती दिखी?
क्या आपको पुरानी जानकारी, गलत विवरण, छूटे हुए संसाधन, बंद होने या सेवा में बदलाव मिले हैं? हमें बताएं ताकि हम समीक्षा कर सकें और इस मार्गदर्शिका को सभी के लिए सटीक और उपयोगी बनाए रख सकें।
आप क्या रिपोर्ट कर सकते हैं
पुरानी जानकारी
जानकारी जो अब वर्तमान नहीं है
लापता संसाधन
सेवाएँ या संसाधन जिन्हें सूचीबद्ध किया जाना चाहिए
गलत संपर्क जानकारी
गलत फ़ोन नंबर, ईमेल या वेबसाइट
बंद होने की जानकारी
संगठन या कार्यक्रम जो बंद हो गए हैं
नए कार्यक्रम
नई सेवाएँ या कार्यक्रम जो हमें जोड़ने चाहिए
सुरक्षा नोट्स
सुरक्षा संबंधी चिंताएँ या महत्वपूर्ण चेतावनियाँ
✨
गाइड तैयार होने के बाद सुधार के विकल्प उपलब्ध होंगे।